जेल अधीक्षक की लाल फीता शाही के खिलाफ लाम बंद हुए जेल प्रहरी

जेल अधीक्षक की लाल फीता शाही के खिलाफ लाम बंद हुए जेल प्रहरी

32 जेल प्रहरियों ने कलेक्टर को सौपा ज्ञापन कार्रवाई की मांग

सारनी। जिला जेल में जब जेल अधीक्षक लाल फीताशाही करने लगे तो अंदाजा लगाया जा सकता है की सुरक्षा प्रहरियों के साथ-साथ विचाराधीन बंदीयो की भी स्थिति किस तरह की होगी। शुक्रवार को उसे समय आश्चर्य चकित का माहौल बना रहा जब जिला जेल के 32 सुरक्षा प्रहरी पुरुष महिला सहित कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के नाम शिकायत देकर जेल अधीक्षक योगेंद्र तिवारी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। कर्मचारियों ने आरोप लगाते हुए जेल अधीक्षक पर अपमानित करने और नियमों को ताप पर रखकर मनमानी किए जाने का आरोप लगाया है। वैसे जेल में 10 बारीक है लेकिन 6 नंबर बेरीक केवल महिला बंधियो के लिए ही है उसमें भी यदि जेल अधीक्षक के माध्यम से मनमानी की जाए तो यह बर्दाश्त से बाहर होगी महिला कर्मचारियों ने भी जिला जेल अधीक्षक पर कई गंभीर आरोप लगाया है जेल में पदक पुरुष और कई महिला कर्मचारियों का कहना है की जेल अधीक्षक योगेंद्र तिवारी मनमाना और तनशाही पूर्ण रवैया अपना कर उन्हें लगातार मानसिक प्रताड़ित कर रहे हैं अधीक्षक कर्मचारियों को बिना किसी कारण के अपने कार्यालय में घंटा खड़ा कर अमर्यादित एवं अशोभनीय भाषा का प्रयोग करके जलील करने का काम करते हैं। जेल अधीक्षक नियमों को तात्पर्य रखकर अवकाश पर जाते हैं उनके दस्तावेजों की जांच की मांग भी प्रहारियों के माध्यम से की गई है। जेल के पूर्व चीफ रामाराव सलामे की माने तो महिला या पुरुष कर्मचारी अवकाश की मांग करता है तो बल संख्या पर्याप्त ना होने का बहाना कर कर्मचारियों के साथ अधीक्षक गाली गलौज से बात करते हैं जो अब आसानी होता जा रहा है,धमकी भी दी जाती है की जेल में कार्य में बाधा उत्पन्न करने का मामला पंजीबद्ध करकर तुम्हें दंडित करने का कार्य किया जाएगा।

बंदियो की व्यवस्था भगवान भरोसे

जिले जेल में इससे बड़ा आश्चर्य क्या होगा की जेल में जो मेडिकल संचालित होती है वह अभिषेक नमक बंदी संचालित करता है जबकि इस जेल में मेडिकल स्टाफ और संविदा के जेल चिकित्सा डॉक्टर राज पांडे को नियुक्त किया गया है लेकिन उनके न होने के कारण मेडिकल स्टाफ भी जिला जेल के अस्पताल नहीं पहुंचते हैं ऐसी स्थिति में हत्या के प्रयास में 10 वर्ष की सजा काट रहे अभिषेक नमक बंदी के माध्यम से 480 बंदी एवं विचार दिन बंदियो का उपचार किया जा रहा है जो कभी बड़ा विस्फोटक रूप ले सकता है। जेल अधीक्षक की लाल फीता शाही की वजह से मेडिकल का काम देखने वाले विशाल जेम्स भी बंदियों एवं विचारा दिन बंदियो  के साथ दुर्व्यवहार करने से बाज नहीं आते हैं।स्थिति तो यह है कि मेडिकल में दूध मुंगफली और गुड़ जैसी सुविधा के लिए भी विशाल जेम्स की मुट्ठी गर्म करनी पड़ती है।

जनप्रतिनिधि आखिर जिला जेल का आकस्मिक दौरा क्यों नहीं करते

बैतूल जिले में भारतीय जनता पार्टी के सांसद और पांच विधायक होने के बाद भी इस जिला जेल में कोई जनप्रतिनिधि औचक निरीक्षण के लिए नहीं जाता है यही वजह है कि मेनू के हिसाब से जो बंदियो को भोजन मिलना चाहिए वह भोजन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य सुविधा और पेयजल दोनों भगवान भरोसे है। जेल में नकारात्मक कई बंदी है जिनकी वजह से कई विचारा दिन बंदी आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। इस पर भी जिला प्रशासन को गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए शिकायत करने वाले प्रहरियों में गीता पपलादे, संगीता पाटिल,सुकलो यादव, आयुषी चौरे,निकहत खान, अनीता मास्कोले,प्रार्थना उपाध्याय,अभिलाष ठाकुर, चंद्रकला अहिरवार,सनद कुमार पंडाग्रे,विशाल जेम्स,रामाराव सलामे,दीनदयाल बाइया, सुल्तान खान,विपिन पंजाबी, अभय सरकार,रामबाबू पटेल, अक्षय मालवी,केशव चौरे,जितेंद्र उइके,युगल देवरे, राहुल पटेल, अजय दोहरे, निलेश अहिरवार, विजय पहाड़े, जितेंद्र रघुवंशी, पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर,अरुण यदुवंशी, राज सागर चौहान,सतीष पखाले,राजेश मीणा,सुनील मसीह  शामिल थे।

 

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