
कोराना काल के समय मां और पिता की मौत होने के बाद गांव के सहारे हैं दो मासूम बच्चे मामा की तरफ मदद की मुंह निहारते
अंगुली पकड़े बच्चे का सहारा है पिता कभी गुस्सा दिखा रहा है पिता पिता पालन है पोषण है परिवार का अनुशासन है
सारनी।सतपुड़ा अबतक डॉट कॉम,स्व.रवि व्यास की पिता पर लिखी कविता एकदम सही चरितार्थ हो रही है पिता पिता घोष से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है पिता पिता रोटी है कपड़ा है मकान है पिता पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान से परिंदे का बड़ा आसमान है पिता पिता प्रदर्शित अनंत प्यार होता है तो बच्चों को इंतजार है पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं पिता है तो बाजार के खिलौने अपने पिता से ही मां की बिंदी और सुहाग है पिता परमात्मा की भक्ति है।यह इसलिए कि 2 वर्ष पूर्व अप्रैल 2020 में ग्राम पंचायत नूतनडगा के गांव निश्चिंतपूर में कोरोना काल के समय में रविंद्र धामी और उनकी पत्नी सुभाषिनी धामी की मौत हो गई तब से 16 वर्ष रिनीता धामी
और 8 वर्ष अनुज धामी गांव की मदद पर जी रहे हैं। यह गांव के सभी लोग खाद्य सामग्री सहित अन्य सामान यह दोनों भाई बहनों को उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं मानव सेवा एकता और अखंडता की मिसाल यदि कहीं देखनी है तो बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के पुनर्वास केम्प चोपना के निश्चिंतपुर गांव में देखी जा सकती है। गांव के सभी लोग अपने अपने स्तर पर यह दोनों भाई बहन की मदद करते हैं वर्तमान समय में बांस मेखम के मकान में यह दोनों भाई बहन रहकर जैसे तैसे अपनी जीविका काट रहे जब हमारे प्रतिनिधि के माध्यम से रविवार के इनके गांव पहुंचे तो 16 वर्षीय निरिता धामी भवर भवर रो पड़ी कि इस दुनिया में उसका कोई नहीं है गांव के सहारे दोनों भाई बहनों का पालन पोषण हो रहा है। अब
उन्हें प्रदेश के मामा शिवराज सिंह चौहान से मदद की उम्मीद की आस लगा कर रखी है।
महिला बाल विकास में आश्वासन दिया पर मदद नहीं भगवान भरोसे भाई-बहन
पुनर्वास केम्प चोपना के निश्चिंतपूर गाव में अप्रैल 2020 को 16 वर्षीय रिनीता और 8 वर्षीय अनुज धामी के माता-पिता कोरोणा काल में काल के गाल में समा गए तब से लेकर अभी तक गांव के उत्तम बाला,अनिलचंद साना, निर्माण दास,गुरु दास, रंजीत गोलदार के माध्यम से गांव से जन सहयोग करके इन दोनों भाई बहनों को खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम करते हैं। जबकि 16 वर्षीय रिनीता कक्षा बारहवीं की विद्यार्थी है और यह चोपना हाई स्कूल में पढ़ाई कर रही है इसके माध्यम से जिला महिला बाल विकास को लिखित आवेदन देकर शासन से सहयोग की मांग की लेकिन महिला बाल विकास परियोजना के अधिकारियों ने इसे सिर्फ गुमराह करने का काम किया है ऐसी स्थिति में प्रदेश के मुख्यमंत्री सोमवार को बैतूल जिला मुख्यालय पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में यह दोनों अनाथ बच्चों को प्रदेश के मामा से उम्मीद है कि वे इनकी जीविका के लिए कुछ शासन से मदद दे पाएंगे।
छोटी सी छोटी जरूरत गांव के लोग रखते हैं ध्यान
निश्चिंतपुर गांव के उत्तम बाला बताते हैं कि गांव की लोगों की मदद से खाद्य सामग्री तो पहुंचा दी जाती है लेकिन बच्चों को रहने के लिए मकान नहीं है यदि प्रशासन इन बच्चों को मदर मकान की सुविधा उपलब्ध कराएं तो ज्यादा बेहतर होगा
उन्होंने बताया कि 2 माह पहले अजगर सांप रात के समय में इनके घर में घुस गया था गांव वालों ने बड़ी मदद करके उस सांप को घर से बाहर निकाला केवल बास मेंखम के सहारे यह दोनों भाई-बहन इस झोपड़ी में अपनी जीविका गुजार रहे हैं। ऐसे में प्रशासन यदि इनकी मदद करें तो इनकी जीविका चल जाएगी उत्तम बाला के माध्यम से उन्हें सरकार के माध्यम से जीविका की व्यवस्था यह सरकारी नौकरी की व्यवस्था करने की मांग भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने रखी जा चुकी है लेकिन प्रशासन ने इनके आवेदन और निवेदन को नजरअंदाज कर रखा है इसे भी दुखद पहलू तो यह कि गांव के लोगों के माध्यम से कई बार कलेक्टर के पास मुलाकात भी की लेकिन रिजल्ट नकारात्मक ही निकला है जिससे अब गांव के लोग प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके भांजे भांजीयों की जीविका के लिए उनकी तरफ टकटकी लगाए देख रहे।





